ईश्वर

ईश्वर तू है सब में,
तू है हर पशु-पक्षी में,
हर नारी और हर नर में,
ईश्वर तू है कण-कण में,

तू है जल और वायु में,
नदी है और सागर में,
इस धरती क रोम-रोम में,
ईश्वर तू है कण-कण में,

तू है तरह-तरह की सुगंध में,
रंग-बिरंगे फूल और फल में,
इस मन के कोने-कोने में,
ईश्वर तू है कण-कण में,

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