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भोग-विलास

कुछ होते है ऐसे लोग, जो धन का करते है पूरा प्रयोग, जीवन को वे जीते-जाते, भोग-विलास में धसते जाते, खेलते है वे ऐसे खेल, जो खाते है उनसे मेल, जुआँ खेलते है दिन-रात, और करते है गन्दी बात, शराब पीकर घर में आते, बीवी-बच्चो पर जुल्म ढाते, हज़ार-हज़ार की शर्त लगाते, जुऐ में सब कुछ हार जाते, जीवन को दुखमय बनाते, एक ज़िंदा-लाश बन जाते, अपना जीवन बर्बाद है करते, औरो को भी तबाह है करते,

ईश्वर

ईश्वर तू है सब में, तू है हर पशु-पक्षी में, हर नारी और हर नर में, ईश्वर तू है कण-कण में, तू है जल और वायु में, नदी है और सागर में, इस धरती क रोम-रोम में, ईश्वर तू है कण-कण में, तू है तरह-तरह की सुगंध में, रंग-बिरंगे फूल और फल में, इस मन के कोने-कोने में, ईश्वर तू है कण-कण में,

सूरज की किरणे

सूरज की किरणे है आती, दूर दूर तक हरियाली फैलाती, हमको किरणों से नहलाती, सबके मन में उमंग जगाती, रंग-बिरंगे फूल खिलाती, सबके मन को महकाती, घने अँधेरे को है चीरती, दुनिया को रौशन कर देती, दसो दिशाओ में फैलती, हर घर में दीप जलाती, सबके लिए प्रेरणा बनती, जीवन को सुखमय बनाती,